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Sunday, May 22, 2011

औरत की हक़ीक़त Part 1(औरत-मर्द के रिश्ते की एक अनूठी सच्चाई सामने रखने वाला एक बेजोड़ अफ़साना) - Dr. Anwer Jamal

धनवीर सिंह जी की आलीशान कोठी रात में रौशनी से जगमगा रही थी। ख़ूबसूरत फूलों की सजावट तो देखते ही बनती थी। आखि़र आज उनकी षष्ठिपूर्ति जो थी। उनके बेटे-बेटियां भी ख़ुश थे और उनके यार-दोस्त और रिश्तेदार भी। सारा घर महक रहा था और हर कोई चहक रहा था। लोग धनवीर सिंह जी की क़िस्मत पर रश्क कर रहे थे। कह रहे थे कि उन्होंने जिस चीज़ को हाथ लगा दिया वह सोना बन गई और उनकी पत्नी तारा देवी अपने दिल में सोच रही थीं कि ‘सच कहते हैं लोग। मेरी तक़दीर भी तो उनके छूने से ही संवरी, वर्ना मैं थी ही क्या ? महज़ एक वेश्या।‘
तारा देवी के दिल में पुरानी यादों ने अंगड़ाई ली तो उनके ज़ख्म उनकी आंखों से आंसू बनकर रिसने लगे।
उन्हें उनकी सहेलियों ने छेड़ा-‘क्या अपने पुराने दिन याद आ रहे हैं आपको ?‘
इतना सुनते ही सभी सहेलियां खिलखिलाकर हंसने लगीं। सभी उनकी ही हमउम्र थीं लेकिन उनमें से कोई एक भी उनकी हमराज़ नहीं थी और यही वजह है कि उनकी हक़ीक़त के बारे में कोई भी कुछ नहीं जानता था । उनकी सहेलियां उनके साथ कमरे तक चुहल करती हुई आईं और जाने क्या क्या सलाह उन्हें देने लगीं ?
तारा देवी के दिमाग़ तक उनकी कोई भी बात नहीं पहुंच रही थी। वह तो बस यही सोच रही थीं कि आखि़र धनवीर ने उन्हें क्यों अपनाया ? जबकि वह उनकी हक़ीक़त ख़ूब जानते थे और विवाह के समय तो वह गर्भ से भी थीं।
        (...जारी, एक यादगार अफ़साना डा. अनवर जमाल की क़लम से पहली बार)